सार छंद
रंग बिरंगे फूलों से ज्यों,महके बगिया सारी ।
दूर देश से आती तितली,लगती सबको प्यारी।।
आओ सुंदर पेड़ लगाएं, उपवन में सब मिलकर।
चंपा जूही फूलों जैसे ,खूब हँसे हम खिलकर।।
नेक काम की खुशबू भी तो, फैला करती जग में।
मातृभूमि के वीर बाल की, गणना होती नग मे।।
फूलों के जैसे तुम खिलना,टूट महक बिखराना।
नश्वर जीवन जान जगत में, फिर माटी मिल जाना।।
कलियों के संग काँटे रहते, लगती छटा निराली,
बन गुलाब सरताज सभी का,महके डाली डाली।।
खिला कमल जो कीचड़ में है,माँ विद्या को भाता,
रंग-रूप औ गंध बताती, सबको रूप सुहाता ।।
सुंदर फूल गुलाब खिले हो,सुरभित बगिया सारी।
कर्म किए जा पावन नर अब,
भला करे गिरधारी।।
पूनम शुक्ला
बहुत सुंदर रचना पूनम जी बहुत बहुत बधाई आपको👏👏👏👏👏👏👌👌👌👌👌👌वाह वाह क्या बात है👏👏👏👏👏
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