*दिनांक-22-02-2022*

*दिन-मंगलवार*

*विधा-गीत*

*प्रदत्त पंक्ति--------->>>*

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धरा सुरक्षित रहे हमारी,मिल कर हम सब हवन करें,

*हरियाली की भीख मांगते,कानन उपवन रुदन करें*।।


तरुओं को सब काट काट कर सड़के चौड़ी कर डाली।

दिखे नहीं गौरैया छोटी,दिखे नहीं कोकिल काली।

विषय बड़ा गंभीर बना है,आओ इस पर मनन करें।

*हरियाली की भीख मांगते,कानन उपवन रुदन करें*।।



जंगल के जीवो का हमने,आश्रय उनसे छीन लिया।

बना हवेली ऊंची ऊंची,काम कौन सा नेक किया।

हरी भरी धरती के बिन हम, भीषण गरमी सहन करें।

*हरियाली की भीख मांगते,कानन उपवन रुदन करें*।



जंगल में जब मोर नाचते,हमको प्यारे लगते थे।

दूर गगन में उड़ते पंछी,जग से न्यारे लगते थे।

हरित वर्ण की आभा से अब, वसुधा अपनी चमन करें।

*हरियाली की भीख मांगते कान्हा उपवन रुदन करें*।।



पूनम शुक्ला

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