*सुंदर प्यारा देश हमारा*

गणतंत्र दिवस के उत्सव को, 

मिल स्वागत की ठानी  है।

प्रकृति करे श्रृंगार धरा का,

पहन चुनरिया धानी है ।


दिवस सुनहरा लोकतंत्र का, 

गणतंत्र हमारा आया है ।

पूर्ण हुआ स्वराज्य का सपना, 

जन्म नया अब पाया है।।


रज कण में शोभित शौर्य देख,

हम गीत विजय के गाते हैं।

पावस है अब दिवस सुनहरे,

 उज्जवल सारी राते हैं ।।


भारत की मिट्टी है पावन,

हम सब शीश झुकाते हैं, 

बलिदानी वीरों की गाथा,

आज सभी मिल गाते हैं।।


क्या करना अब  क्या ना करना, 

संविधान हमे सिखलाता है।

वीरों का बलिदान दिवस शुभ ,

याद हमें अब आता है ।।


बांध कफन को सिर पर उसने 

माँ को गले लगाया है।

देख तिरंगा बाना पहने ,

वीर युद्ध से आया है।।


 मातृभूमि की रक्षा खातिर

 सीने पर गोली खाता है।

 नमन हमारा उस जवान को ,

जो देश हित मिट जाता है ।।


धरती पर अधिकार हमारा ,

नीला अंबर मेरा है ।

नमन सभी का मातृभूमि को,

देवों का अब डेरा है।


 उठो धरा के वीरो जागो,

 भुजबल को दिखलाना है।

उड़ा शत्रु के होश युद्ध में,

 माटी तिलक लगाना है।


 धर्म समरसता का पाठ सीख,

 अमन-चैन अब लाना है ।

जाति धर्म में भेद ना करके,

 भारत  एक बनाना है ।


भारत के कण-कण में मोती,

 बूंद बूंद में सागर बहता ।

भरे हुए हैं कोष  अन्न से,

नदियों का जल अमृत रहता।


 पृथ्वी अग्नि आकाश सरीखे,

 प्रक्षेपास्त्र है बने हुए।

 त्रिशूल अग्नि की बात करें क्या, 

वीरों के सीने तने हुए ।


खूँ से सींचा मातृभूमि को ,

तब आजादी पायी है।

विलग हुए जब अपनों से हम ,

तब स्वतंत्रता आयी है।।


भारत के जननायक तुमको,

 राष्ट्र धर्म दिख लाना है।

 धूमिल होती आशाओं का,

 गीत नवल अब गाना है।।


गणतंत्र दिवस को आप सभी ने,

 मिल स्वागत की ठानी है ।

प्रकृति करें श्रंगार धरा का,

 पहन चुनरिया धानी है।।


पूनम शुक्ला

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