भुजंग प्रयात छंद
विधाता गज़ब की कला है तुम्हारी,
गढ़ी नार जग में बनी स्रष्टि सारी।
किया काम सुन्दर बना देवि नारी,
नमन है विधाता गगन से उतारी।।
दिया प्यार नारी सभी को जहॉं पर,
तभी पूजनीया बहुत है यहॉं पर।
बनी झील आँखे नजारा सुहाना,
जरा पास बैठो नजर तो मिलाना।।
हटा केश अपने दिखा दो खजाना,
नहीं तुम छिपाना नहीं तुम सताना।।
*निशा में निहारूं, भले बंद आँखे*,
लिया चूम मैंने अधर मान पाँखें।।
सजे माथ बिंदी सजे बाल गजरा,
सजे हाथ चूड़ी सजे आँख कजरा।
सजे पांव पायल सजे ओठ लाली,
सजे नाक नथनी करो तुम उजाली।।
2
तिरंगा
खिलेंगे सुमन अब सदा ही चमन में,
मिली है अजादी सभी को वतन में।
कटाना पड़े शीश पीछे हटे ना,
करे प्रार्थना यूँ कभी हम बँटे ना।।
दिया सौप भारत करोगे हिफाजत,
करोगे नमन सुन सभी की शहादत।
*उठो नौनिहालों समय है तुम्हारा*,
*संभालो तिरंगा लगे खूब प्यारा*।।
3
भुजंग प्रयात छंद
झुकेगा तिरंगा कभी भी न प्यारे,
लगा ले भले जोर मिल श्वेत सारे।
मिटे देश खातिर शहीदों नमन है,
बनाया तुम्हीं ने वतन को चमन है
लहूँ को बहाकर तिरंगा मिला है,
तभी देश भक्तों चमन यह खिला है।
रहे याद तेरा पराक्रम न भूलें,
*उठाके तिरंगा गगन आज छूलें*।।
4
भुजंग प्रयात छंद
26/1/22
विषय तिरंगा
लिया है तिरंगा सभी ने करों में,
दिया मार दुश्मन उन्हीं के घरों में।
करी देश रक्षा कटा शीशअपने,
चलो राह उनके करो पूर्ण सपने।।
5
विषय उन्माद भुजंग प्रयात छंद
*तिमिर नाश कर के करो तुम उजाला* ,
बनों सूर्य सबके दिवस हो ना काला।
*दिखा दो पराक्रम सभी तोड़ तारे*,
बड़े खूबसूरत सभी है नजारे।।
भरे हैं खजाने प्रकृति में हमारे,
लिया नीर हमने धरा चीर प्यारे।।
कभी ना डरो काम छोड़ो अधूरे,
अगर बात मानो करो काम पूरे।
किया है इरादा करें काम कल को,
कभी हो न पूरे लगा खूब बल को
दिवस कल न आये करो आज प्यारे
कभी भी न टालो करो काम सारे।।
6 याद
हमारी कभी याद आये बताना,
भुला कर हमें तुम नहीं अब सताना,
*बने हो विधाता लखन प्राण मेरे*,
सदा याद रखना हृदय के चितेरे।
*सिया राम को पूजते लोग सारे*
*मगर उर्मि तो राह तेरी निहारे* ।
प्रतीक्षा करूंगी लखन मैं अकेली,
विरह की अगन जो बनी है सहेली।।
लखन को दिया जो वचन था निभाना,
अश्रू एक नैनन कभी ना बहाना।
*भले उर्मिला को नकारे जमाना*,
*मगर त्याग उसका लखन ना भुलाना*।।
पूनम शुक्ला
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