कहानी पार्ट 2
पुरानी रीति परम्पराओं को कब तक माना जाए।सास ससुर की बेफिजूल बाते हमारे परिवार में यह होता है यह नहीं होता है।अरे भाई ,तब समय दूसरा था लोग एक दूसरे की बातों को समझते थे पर आज विकास वादी युग में किसको किसकी परवाह। अब समय दूसरा है अब इन पुरानी घिसी पिटी परंपराओं को मानने से क्या लाभ। हम तो नहीं मानते हैं और न ही हमारे शिक्षित मायके के लोग।हमारा परिवार के लोग इतने दकियानूसी नहीं है पर हमारे यहां ससुराल का बहुत बुरा हाल है कितने अनपढ़ जाहिल पुराने खयालों वाले लोग है । अगर हम भी इन सब बातों को माने तो मुझमें और अनपढ़ लड़की में क्या फर्क।विवाह के बाद ढ़ाई साल ससुराल में रही ।क्या क्या सहन नहीं किया।आजकल की लड़कियां 12-12 बजे सोकर उठती है और मैं एक दिन सात बजे के बाद उठी तो कितनी बाते सुननी पड़ी ।सबने खूब गालियां दी। ऐसे ही कोरोना में मेरी सास बर्तन तो मांज लेती थी पर क्या मजाल कि खाना बना दे ।मुझे सास ससुर देवर पति इतने बड़े परिवार का दोनों समय का खाना बनाना पड़ता था।और तो और कई बार मुझे नौकर कहा गया।मैने अपने मायके में कभी काम नहीं किया। खाना भाभी बनाती थीं और ऊपर के काम मम्मी कर लेती थी मुझे कभी कुछ किसी ने करने नहीं दिया ।और मैने यहां पूरे कोरोना में खाना बनाया। इसीलिए इन सबकी हरकतों से तंग आकर मैने अपने पति के संग जाना पसंद किया। गर्भवती होने पर भी मैं मजबूरी में वहां रही ।मेरे पति कोरोना में घर आ गए थे और मैं भी कोई नौकरी नहीं करती थी तो मजबूरी में वहां रहना पड़ा।
वैसे भी मुझको वहां जाकर रहना कभी पसंद नहीं था ऐसी टिपिकल ससुराल ऐसे लोग जिनको कभी हमारा ख्याल नहीं ।जिन्होंने कभी हमारा ध्यान नहीं रखा ।हमें हमारे घर जाने नहीं देते थे। 2023 के बाद मैं अपने मायके नहीं जा पाई।मै मां बनने वाली हूं इसका यह मतलब तो नहीं कि रात में मै बाहर न जाऊं । मेरे पास शाम सात बजे के लगभग मेरे घर से फोन आया कि मां बीमार है मैने अपने भाई से दोबारा फोन करके अपनी मां का हाल पूछा,भाई ने कहा कि सब ठीक है बीपी की समस्या हो गई है मै फिर भी अपने घर जाना चाहती थी पर रात में जाने से बचना चाहिए यह कह दिया ,उसके 1 या 2 घंटे बाद घर से फोन आ गया की मम्मी नहीं रही।और फिर ससुराल वालो की क्या मजाल कि मुझे रोक पाते ।अपनी बीमार मां को देखने इन लोगों की वजह से नहीं जा पाई। यह करो वह न करो ,यहां जाओ ,वहां मत जाओ ।मायके मत जाओ।।जहां हर समय रोक टोक होती हो।आजकल के जमाने की कौन लड़की इस परिवेश इस माहौल में इस वातावरण में रह सकती है ।स्वतंत्र रहना किसको नहीं भाता।आजकल स्वतंत्रता चाहिए पैसा हो या ना हो ।तुम्हारी जमीन जायदाद पैसा किसी को कुछ नहीं चाहिए । हम तो गरीबी में भी हम गुजारा कर लेंगे पर ऐसी टिपिकल ससुराल में रहना किसी भी इंसान के वश में नहीं है।आजकल के जमाने में स्त्री गरीबी में गुजारा कर सकती है पर आजकल की कोई लड़की ऐसी जगह रहना कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती है। तो अगर मैंने ऐसा किया है तो मैंने कुछ गलत नहीं किया ।अब नौ महीने डॉक्टर का ट्रीटमेंट हरिद्वार चला ।मै और मेरे पति ने यहीं समय गुजारा। घर के लोग इस लायक नहीं थे कि उनके पास जाकर बच्चे को जन्म दिया जाए।अरे सभी लोग चाहे मेरी सास हो ससुर हो या देवर। अत्याचारी है बदतमीज है उनको हमारे सुख दुख से कोई मतलब नहीं है । ऐसे लोगों का इलाज कोई नहीं कर सकता है । और तो मैं तो अभी भी जाना नहीं चाहती । लेकिन मेरा दुर्भाग्य एक यह है कि मेरा मायका भी वही है जहां मेरी ससुराल है अगर मायके जाने की बात मै करती हूं तो ससुराल भी जाना पड़ेगा। मेरी माता जी तो अब नहीं है लेकिन पिताजी भाई भाभी उनके तीन प्यारी बेटियां जो हर समय मुझ पर जान छिड़कते है ऐसे प्रेम करने वाले लोग । मै भी उन पर जान छिड़कती हूं।।मैं अगर वहां जाऊं तो मेरे पतिदेव पहले उस नरक के द्वार यानि कि मेरे ससुराल ले जाएंगे ।इस पसोपेश की स्थिति से मै गुजर रही हूं। अब जिस कारण मैने ससुराल में बच्चे को जन्म नहीं दिया कि वहां मेरी मानसिक स्थिति खराब हो जाती है पर मेरा दुर्भाग्य है वही सास फिर मेरे घर आकर धमक गई।मै उनसे छुटकारा तो बहुत चाहती हूं।पर अभी कोई तरीका नहीं सूझ रहा।और सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर वहां जाना पड़ा तो मैं कैसे रहूंगी।मुझे शादी के बाद ही ससुराल का कोई सदस्य पसंद नहीं आया।।इसीलिए मैने कभी किसी से बात नहीं की ।मेरे बात न करने पर मुझे हमेशा यही ताना मिलता था कि तुमने मेरे घर का वातावरण खराब कर दिया।जब मुझे उन लोगों से बात करना पसंद नहीं था तो मै बात क्यों करती।अब मेरे बात न करने से उनके घर का माहौल खराब हुआ हो तो हो।मुझे क्या फर्क पड़ता है । केवल मायके वालों से ही मोबाइल पर बतिया कर अपना समय पास करती थी और मन बहला लेती थी।
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