नया साल कविता प्रदीप छंद

 प्रदीप छंद नमन मंच🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻




जग जननी मां दुर्गे तेरी, आज उतारे आरती।

चैत्र मास के प्रथम दिवस पर, नमन करें हम भारती।

जन जन के जीवन में खुशियां, ऐसा यह नववर्ष हो ।

नवल उमंग उल्लास हिय में,हर्ष भरा उत्कर्ष हो।।


*नया साल शुभ हो*,*नया साल शुभ हो*।।



हरियाली से आच्छादित यह,सबका प्यारा मास है ।

नए साल की भोर सुहानी, लगती सबको खास है।

आमों पर अब बौर खिले हैं,मनवा नाचे मोर है ।

कोयल की सुन कूक सुरीली, मचे हृदय में शोर है।।



*नया साल शुभ हो*,*नया साल शुभ हो*।।


नव पल्लव से वृक्ष सुशोभित, भारत देश महान के ।

नव वर्ष का करें सुस्वागत,अद्भुत संग विहान के। 

शुरु सनातनी साल आज से, शपथ नेक अब लीजिए।

 जाति पांति के भेद मिटाकर, पूर्ण प्रतिज्ञा कीजिए।


*नया साल शुभ हो*,*नया साल शुभ हो*।।


रहें धरा पर सभी स्वस्थ अब, करते हैं अभ्यर्थना।

चरण पखारे जगदंबा के,करके नित हम प्रार्थना ।।

अपनों से भी कभी न हारे,प्रभुवर ऐसी जीत दे।

मनुज मनुज में भेद मिटे सब,ऐसी सबको प्रीत दे।।


*नया साल शुभ हो*,*नया साल शुभ हो*।।


सिंदूरी आभा से जगमग,लोहित नभ अब आज है।

स्वर्ण रश्मि का आज धरा के, कण कण पर अब राज है।।

उज्ज्वल कल के लिए आज ही, मां मुझको वरदान दो।

भाव पिरोऊं छंदों में मैं,संग कंठ में गान दो।।


*नया साल शुभ हो*,*नया साल शुभ हो*।।


पूनम शुक्ला बरेली

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