16 16 मात्राएँ
नवरात्रों की पावन बेला,
नाच रहा है मन अलबेला ।
कृपा सदा माँ बरसाती है,
कैसे सबको हरषाती है ।।
नाम शैलपुत्री मन प्रीता।
वेद सार यह पावन गीता।।
आज फूल से द्वार सजाया।
मैया को अब घर पर पाया।।
मैया के सम नाम न दूजा।
करते प्रेम भाव नित पूजा ।।
माँ सबकी हो पालन हारी ।
दास तुम्हारी जनता सारी।।
पूनम शुक्ला
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