कुंडलिया
विषय मजबूरी
दो जून का पेट भरे, करना है कुछ काज ।
बच्चे भूखे ना रहे ,काम करें हम आज ।।
काम करें हम आज, यही विश्वास दिलाये।
घर अन्न और वस्त्र ,सभी अब निश्चित पाये ।
मजबूरी नर सदा, कभी ना पाये प्रसून।
प्रभु कृपा बनी रहे, तब पेट भरे दो जून।
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मात-पिता ने पाल कर, बेटे किये बलवान ।
रंग बदलकर सुत सभी, दे न सके सम्मान।।
दे न सके सम्मान ,सभी से नाता तोडे ।
मजबूरी कैसी जान , संग नारी रिश्ता जोडे।
कहे पूनम यह क्या, करें अब समय बिताने।
किया कौन अपराध ,पालकर मात पिता ने।।
पूनम शुक्ला
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