कुंडलिया

विषय मजबूरी


दो जून का पेट भरे, करना है कुछ काज ।

बच्चे भूखे ना रहे ,काम करें हम आज ।।

काम करें हम आज, यही विश्वास दिलाये।

घर अन्न और वस्त्र ,सभी अब निश्चित पाये ।

 मजबूरी नर सदा, कभी ना पाये प्रसून।

 प्रभु कृपा बनी रहे, तब पेट भरे दो जून।

2

मात-पिता ने पाल कर, बेटे किये बलवान ।

रंग बदलकर सुत सभी, दे न सके सम्मान।।

 दे न सके सम्मान ,सभी से नाता तोडे ।

मजबूरी कैसी जान , संग नारी  रिश्ता जोडे।

कहे  पूनम यह क्या, करें अब समय बिताने।

 किया कौन अपराध ,पालकर मात पिता ने।।



पूनम शुक्ला

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