घनाक्षरी


ज्योति जले अंतर्मन ,दूर होवे तम घन,

बीज नफरत हटा,

 दिवाली मनाएंगे।।


 मन मधुरता छाये, सदभाव मन भाये  ,

तृप्ति आभा फैला कर ,

 तिमिर  हटाएंगे।।


 दीप जगमग करे ,पाप सब ईश हरे,

 दिवाली के पर्व पर ,

सदन सजाएंगे।।


 प्रभु राम सीता संग , स्नेह युक्त  अंग अंग,

 चहु दिसि सुख शांति ,

देव बरसाये़गे।।


पूनम शुक्ला

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