चौपाई छंद
बात गाँव की बड़ी निराली,कूजे तरु पर कोकिल काली।
सब्जी भाजी ताजी मिलती, बेला जूही ढेरों खिलती।।
गांव हमारा सबसे प्यारा ,प्यारा है यह गांव हमारा।
शुद्ध हवा खेड़ा से पायेँ ,होते भोर सैर को जायें।।
नदियों का जल कल कल करता ।
शीतल खुशबू हिय में भरता ।।
कच्चे घर की बात पुरानी, ट्यूबवेल में बहता पानी।।
ये पगडंडी घर तक जाती । लिपा पुता घर है तब पाती।।
देख कृषक का मन है रोता। बिन छप्पर के कैसे सोता।।
जीर्ण शीर्ण सी देह तुम्हारी,कृषक देव तुम पालन हारी।।
कभी समय जब हम है पाते,गाँव घूमने हम है आते।।
हांडी मटठा माखन खाते,गन्ना सरसो नित नित पाते।।
मिल सब यहाँ प्यार से रहते,इक दूजे से सुख दुख कहते।।
पूनम शुक्ला
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