श्रंगार छंद


हाथ है जिसने मेरा थाम,

शीश पर धरे हाथ प्रभु राम।

सिया है हर पल जिनके साथ,

भक्त के  प्यारे  है प्रभु नाथ।।


मात है तीन जनक है तात,

सोच कर किया बडा प्रतिघात।

सभी के प्रिय है अब अभिराम,

जपा कर उनका प्रतिपल नाम।।


अवध है प्यारा उनका धाम ,

करे हैं वंदन लेकर नाम।

भरत को भाई  पर  अभिमान,

चरण को पूज करें हैं मान।।


पूनम शुक्ला

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