आशा लावणी
लावणी छंद
छाँट निराशा काले बादल, उजियारा मन में भरना।
आशा का अब दीप जलाकर, कष्ट सभी के तुम हरना।।
अगर सफलता पानी तुमको,बढ़ते आगे ही जाना,
भीषण झंझावातों में भी,नही तनिक तुम घबराना।
पुष्प सेज ना यह जीवन है,समझ बूझ कर पग धरना।
आशा का अब दीप जलाकर,कष्ट सभी के तुम हरना।।
सुख दुख जीवन के साथी है, विचलित इनसे मत होना,
मन में रख विश्वास ईश पर ,धैर्य कभी तुम मत खोना ।
बिखरे शूल समेट पथिक के ,
बनना तुम निर्मल झरना।
आशा का अब दीप जलाकर, कष्ट सभी के तुम हरना।।
उम्मीदों की कली खिले औ , जीवन सबका महकायें।
लक्ष्य साधना जिनकी मंजिल,
गिरि शिखरों पर चढ़ जायें ।
छोड़ दुखों के कच्चे धागे ,रुदन कभी तुम मत करना ।
आशा का तुम दीप जलाकर ,कष्ट सभी के तुम हरना ।।
पूनम शुक्ला
बहुत बेहतरीन रचना आपकी आदरणीया बधाई आपको👏👏👌👌🙏
Comments
Post a Comment