मनहरण घनाक्षरी महा गौरी

श्वेत वस्त्र धारे अम्बा, मन राखे नही दम्भा।

 भुजाएं शोभित आठ,

 लगती निराली है।।


 त्रिशूल है कर सोहे, रूप तेरा जग मोहे,

 पाप कर्म नष्ट सारे,

 जगत उजाली हो ।।


शिव वरदान पाया , गौर वर्ण पायी काया,

 महागौरी महामाया,

 मैया रुद्र काली हो।।


 वैभव ऐश्वर्य दाता ,गीत मैया नित गाता,

 दर्शन दो जगदंबा,

 श्रेष्ठ बलशाली हो।।


पूनम शुक्ला

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