दोहे किसान
, दोहे
धरती कहे किसान से ,तुम पर जग का भार
संग तुम्हारे देश के ,बाल वृद्ध नर नार।।
बोओ सीना चीर के, धरती कहती आज ।
फल फूल अरु अन्न संग,मिलते चावल प्याज।
देने वाली है धरा , देती जीवन दान।
सुरभित जिससे जग हुआ, रत्नों की वह खान।।
धरती माता कह रही ,समझो मत बेजान।
गहना मेरे प्रिय तरू ,मत काटो नादान।।
पूनम शुक्ला
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