नारी
घनाक्षरी
नारी की इज्जत आज ,ध्वस्त हुई सरे राह ,
महिला सशक्त बने,
जग में सम्मान हो ।।
दहेज लालची जन, मांगे सोना चांदी धन ,
दुष्ट पापी को तो अब,
जेल प्रावधान हो ।।
कन्या परिधान पर, करते जो छींटाकशी,
दरिंदगी कृत्य पर ,
सजा न आसान हो ।।
शैतानों के हवस की,अबला शिकार बनी,
ऐसे शिकारी को तो, मौत का विधान हो।।
पूनम शुक्ला
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