विषय पुरुष छंद चौपाई
नर प्रधान समाज है जानो।
नारी का परमेश्वर मानो।।
नर नारी का भेद अनोखा ।
लगता रिश्ता सबको चोखा।।
विधि लीला होवे अचरायी।
नर को भी है नारी जायी।।
सबके प्यारे राम हमारे।
मर्यादा के पोषक न्यारे।।
मान पिता रख घर है छोड़ा
पलक झपकते मुख हैं मोड़ा।।
आज पुरुष की बात निराली।
प्रतिदिन लेता मद की प्याली।।
नर बनता है भाग्य विधाता।
अपने गुण वह खुद से गाता।।
चौसठ विद्या माधव ज्ञाता ।
छोड़ अहम तब उनको पाता।।
विषय पुरुष पर राय विलग है
नर का मन तो सदा अलग है।।
जहां दिखे अबला बेचारी
नोच नोच कर जाती मारी।।
आज व्याप्त है जो बीमारी।
उसमे नर का पलड़ा भारी।।
नारी को देवी सम माना।
वही पुरुष है सच्चा जाना।।
जंतु योनि में मानव आएँ।
नैनो का यह भ्रम कब जाएँ।।
माता से कुछ शिक्षा पाओ।
नर सुवास जग में बिखराओं।।
कह पूनम मन बहुत कलेशा।
रहे भाव ना अब कुछ शेषा।।
पूनम
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