सरसी छंद

सुन्दर जीवन दिया ईश ने,पकड़ो उसका हाथ।

दुष्कर्मों से नाता तोड़ो, मिलता प्रभु का साथ।।

देख दूसरों को तुम सीखो,सुन्दर गहरी बात 

नहीं मिलेगा वक़्त दिवस में, होती छोटी रात।।


कभी किसी से द्वेष न पालो,पावन निर्मल भाव।

नश्वर जीवन जान जगत में,  पार लगे अब नाव ।।

सदाचार हो सबके मन में ,उत्तम श्रेष्ठ  विचार।

मानव अब मानव से लेकिन,करें नही व्यभिचार।।


सुन्दर सपना देखा हमने,बीत गया है साल।

चलेअहिंसा पथ पर हम सब,समय कटे खुशहाल।।

परम पिता के हम सब बच्चे, जग मेरा परिवार।

मिलजुल कर सब रहना सीखें, करके सम व्यवहार।।


दोष स्वयं  में खोजो तुम नित ,होवे ऊँचा भाल।

राई बराबर दोष देख अब,नही बजाओ गाल।।

सतपथ के अनुगामी बनकर,किया नेक तुम काम।

परहित में अर्पण कर जीवन,करना ना विश्राम।।


पर उपकार जगत में केवल ,करता हरदम वीर।

रण में भी अब दमका करते,देखो कैसे धीर।।

स्वर्ण रश्मियाँ बन के बिखरों,चमके उन्नत भाल ।

रखो आचरण पावन मन  में, भारत के हो लाल।।


पूनम शुक्ला

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