छंद दोहे
1/10/21
नीयत हो उत्तम सदा , बनों नेक इंसान।
नहीं फसे जंजाल में, बनती है पहचान।।
जन्म मृत्यु से तार दो, विनय करुँ भगवान।
जी का है जंजाल ये, होता नहीं निदान ।।
मन में अब संतोष रख, देना ना कुछ ध्यान।
छोड़ जगत जंजाल को, दिया गुरू ने ज्ञान।। ।।
जाति धर्म में भेद ये ,जी का है जंजाल।
मानव है सब एक सम,छोड़ो सब तत्काल।।
करनी ऐसी चाहिए , होय प्रशंसा रोज।
खुशबू फैले दूर तक, जैसे खिले सरोज।।
चिंता तो जंजाल यह, देना प्रभु पर डार।
दूर करेंगे दुख सभी, होगा बेड़ा पार।।
कर्म सभी ऐसे करें ,लगे न जी जंजाल।
रहे कभी संताप ना , रहे सभी खुशहाल।।
दया दिखाओ जीव पर,उसमे भी है जान।
लगता क्यों जंजाल ये,क्या मिलती है शान।।
मान जगत जंजाल है , लिप्त न हो भरपूर।
दो दिन का जंजाल है,जाना है अति दूर।।
भटके माया मोह में ,मान जगत जंजाल।
ना आये कुछ काम ये , हाल बने बेहाल ।।
मानव जीवन जो मिल , करो श्रेष्ठ तुम काम।
नहीं फंसो जंजाल में , कर लो जग में नाम।।
पूनम शुक्ला
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