छंद चौपाई  वृक्ष

वृक्ष हमारे जीवन दाता।

मानव इससे सब  कुछ  पाता  ।।


 प्राणवायु भी देने वाला ।

दुख सबका हर लेने वाला ।।


नदियां देती मीठा जल है ।

पानी से ही निश्चित कल है।।


 डाल गंदगी मीठे जल को ।

नष्ट कर रहे अगले पल को।।


पेड़ लगाओ धरा बचाओ।

मीठे फल तुम नित ही खाओ ।।


वृक्ष धरा के भूषण जानो।

बात सदा ही मेरी मानो ।।


काट बनो को शहर बसाया।

जीव जंतु का हुआ सफाया।। 


 पेड़ काटते तुम हो कैसे।

 बंजर करते बसुधा ऐसे।।


पूनम शुक्ला

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