मनहरण घनाक्षरी


मधुमय शीतलता, शरद चांदनी देती,

शरद पूर्णिमा आई,

 करके श्रंगार रे।।


 खिली जैसे ज्योति उर, बाल नारी मुनि सुर,

 स्वागत रजनी करें,

 सजे घर द्वार रे ।।


पूजा-पाठ भक्त करें ,प्रभु रोग सब  हरें,

 पाप मुक्त नर  होगें,

 मिटे अनाचार रे।।


 दूधिया चांदनी संग, बिखरे विभिन्न रंग,   

कार्तिकेय जन्मदिन ,

करें जय कार रे।।


पूनम शुक्ला

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