तांटक छंद चंद्र शेखर आजाद
तांटक छंद
चंद्र शेखर आजाद
आजाद नाम था प्रिय उसको,माँ देवी जगरानी थी,
देश नाम पर मर मिटने की,उसने मन मे ठानी थी।।
भीलों का गॉव भावरा पितु, सीताराम तिवारी थे,
मातृभूमि की रक्षा खातिर,अपना सब कुछ वारी थे।।
बचपन में ही जान गया था ,गोरों के मन काले हैं।
धर्म जाति पर भेद किया औ,दुष्टों की यह चाले है ।।
बापू थे आदर्श भले पर ,मन से ना जुड़ पाया था।
आजादी का अमर तराना ,दिल से सुंदर गाया था ।।
बचपन में जो कोड़े तन पर, गोरों से वह खाए थे ।
जीवन भर आजाद रहे फिर, चंगुल में ना आए थे।।
जीवित मुझ को पकड़े यह तो, नहीं भाग्य का लेखा है।
संकल्प शक्ति के दम पर हमने, भाग्य बदलते देखा है।।
अलफ़्रेंड पार्क का देश भक्त , योद्धा हिंदुस्तानी था।
मार कनपटी गोली खुद को, भारत का सेनानी था।।
पूनम शुक्ला
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