मनहरण घनाक्षरी दिवस जीवन चार

 मनहरण  घनाक्षरी



दिवस जीवन चार ,कैसे माने हम हार ।

दमन दुष्कर्म सदा,

 करे हम डट के।।


 आपका आशीष मात , कृपा करो प्रभु तात,

 कीमती समय अति,

  काम करें हट के।।


 जन्म लिया नर तन , बने नेक हर जन ,

व्यर्थ बात छोड़ कर,

 दोष दूर घट के।।


  योग करो स्वस्थ रहो ,राम-राम *नित* कहो ,

ध्यान जाप करो सदा,

 नहीं मन भट के।।


पूनम शुक्ला

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