हास्य मनहरण घनाक्षरी वानर है। र,
मनहरण घनाक्षरी हास्य
वानर है पेड़ पर,खाये फल तोड़ कर,
उधम मचाये बड़ा,
अब तो भगाइये।।
डाल डाल कूद कर,देखो आंख मूँद कर,
छीन लिया फल मीठा,
डंडा तो मंगाइये।।
समझे है हनुमान, आंकें नहीं कम शान,
खो खो कर धमकाये,
कोई तो डराइये ।।
बुलावा मगर आया,सज धज वह आया
खूब खाये फल मीठे,
कलेजा दिलाइये।।
पूनम शुक्ला
क्रमांक 28
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