कुकुभ छंद
गाँव जवाली जिला सतारा,
मालसुरे तब है आया
पाकर पावन धर्म सनातन, मातृभूमि को हरषाया।।
*शिवा का वह मित्र घनिष्ठ था*,
कहते उसको सब ताना
देश भक्ति थी उसके अंदर,
*केसरिया सचमुच बाना*।।
किला रहा जो सबसे विस्तृत,
*जीजा का हैं दिल डोले*।
हासिल करना वापस इसको,
थे आँखों मे बस शोले।।
पांच हज़ार मुगल थी सेना,
किला भेद अब करना था।
रहे सिपाही संग तीन सौ ,
नही किसी से डरना था।।
ताना जी की पूरी सेना,
प्राची में हैं जमकर बोली
उदयभान रखवाल किले का,
दागी अब डटकर गोली।।
राजपूत की ढाल टूटना,
सुयश वीरगति अब पाना।
साहस,शौर्य वीर का स्वामी,
जग में हुआ अमर ताना।।
पूनम शुक्ला
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