हिंदी तांटक छंद
मिश्री जैसी मीठी हिंदी, लगती सबको प्यारी है।
*बोली इसकी मधुर मनोरम,सब कुछ इस पर बारी है* ।
हर भाषा की जननी हिंदी, सब की राजदुलारी है।
संस्कारों की भाषा हिंदी, सारे जग से न्यारी है।।
सबसे प्यारी इसकी बोली, बसती जान हमारी है।
तकनीकी विज्ञान से पोषित, सुरभित धरती सारी है।।
अनुपम वाणी है मनभाती ,जीवन सुरभित करती है ।
अलंकार से सजी हुई यह, मोहक सी अब लगती है ।
भेदभाव ना आता करना,पावन निर्मल पानी है।
अद्भुत अविरल मनमोहक सी, यह जानी पहचानी है ।।
एक नहीं अब दिवस हो हिंदी, हर दिन अपनाना होगा।
*देकर के सम्मान इसे युग ,हिंदी का लाना होगा*।।
हिंदी है पहचान देश की, सरल राष्ट्र की वाणी है।
गर्व हमेशा है हिंदी पर , कहते हम कल्याणी है।।
*पाया है आशीष बहुत ही , नव पथ की लाचारी है*,
वेद रिचा की पोषक हिंदी, अपनों से वह हारी है।।
राजकाज की भाषा बनकर ,झंडा फहराना होगा।
*सुन्दर छंदों की रचना कर,गान मधुर गाना होगा **।।
पूनम शुक्ला
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