कुकुभ छंद भारत की रज कण
कुकुभ छंद
भारत की रज कण में साहस, नमन वीर का करते हैं,
भारत का जो मान बढ़ायें , कथा उन्हीं की गढ़ते हैं ।
पितु विश्वनाथ माता राधा, का बेटा था अलबेला,
बाजीराव पेशवा जिसका, युद्ध बना था प्रिय खेला।।
रग-रग में था साहस जिसके, शत्रु कभी ना टिक पाया,
ढ़ेरो युद्ध लड़े जीवन में, किला शत्रु का सब ढाया ।।
नीला गंगा सारंगा औ, औलख उनके प्रिय घोड़े ,
अद्भुत रण कौशल के दम पर, दुश्मन को भी कब छोड़े।।
या
देख पवन का रुख़ मोड़े ।।
पूनम शुक्ला
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