रोला छंद विषय समदर्शी

 रोला छंद    विषय समदर्शी


करके सबसे प्रीत,रहे जीवन समदर्शी।

देना हरपल साथ,धरा ज्यूँ पावन सरसी।।

होंगे जब प्रिय भाव ,सभी के साथ दुलारे ।

सबका पाओ मान, जगत में सबके प्यारे ।।


समदर्शी बन शान , कार्य तुमको है करना।

 रहना सबके साथ, सभी के दुख  है हरना ।।

तन पाया इक बार, राह सच की तुम जानो ।

 प्रभु पर रख विश्वास,दृष्टि सबकी पहचानो।।


निष्कलंक हों पार, ईश से विनती करती ।

फँसे नहीं मझधार , सदा मन में हूं डरती।

जीवन है अनमोल, समझकर कदम बढ़ाते ।

समदर्शी प्रभु भाव ,सदा हम पर बरसाते।।


पूनम शुक्ला

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