सुख दुख मिश्रित बरसात पर दोहे

 सुख दुख मिश्रित बरसात पर 


दोहे


आया सावन झूम कर ,लेकर के सौगात।

 वर्षा की बूंदे पड़े, झूमे  तरु के पात।।



सुनकर के बरसात का, मन में आयें भाव।

 साथ पकौड़ी चाय के, कागज की हो नाव ।।


 मन प्रमुदित अब हो गया, सुन बूंदों का शोर ।

 जीवन में हो  ताजगी, आएँ  सुंदर  भोर।।


 सावन में हम झूलते, झूला तरु पर डाल ।

खेतों को  अब मेघ ने , बना दिया है ताल।।


 कैसे सावन देखता, धरती का अब हाल ।

अतिशय बारिश धूप से ,धरा हुई बेहाल।।


  छाये मेघा देखकर , वरखा की है आस ।

संग पवन अब चल दिये ,कंटक बनती घास।।


 हिय कंपन करने लगे ,आती जब बरसात ।

सिर पर छप्पर  है नहीं, कैसे बीते रात।।


 मंदिर में अब बैठकर ,ईश भजूँ दिन रात ।

सुन लो मेरी प्रार्थना, बंद करो बरसात।।


पूनम शुक्ला

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