मनहरण घनाक्षरी तीन नगण से प्रारंभ

 मनहरण घनाक्षरी

तीन नगण से प्रारंभ

🌹🌻🌹🌸🌻🌹💦🌹🌻🌸


कमल गुलाब खिले ,जूही गेंदा सब मिले  

देखकर सुंदरता,

 मौसम महके रे।।


  बेला चंपा नाग चंपा, गुड़हल बचनाग,

  अबोली चमेली नीम

 विहग चहके रे।।


मोंगरा कामिनी फूल,कनेर नलिनी पीली,

वासंती जंगली मूँग,

मानस बहके रे।।


पलाश मेहंदी गुल,गुल बहार केतकी

सूर्य मुखी डेहलिया, चमन कहके रे।।


पूनम शुक्ला

Comments

Popular posts from this blog

कहानी पार्ट 1

नया साल कविता प्रदीप छंद

संस्मरण बिस्तरबंद