मनहरण घनाक्षरी
शुभ भोर देखकर, जगे सब नारी नर,
प्रभाती सुहानी दिखी,
स्वर्ण रश्मि छान के।।
सुगंध पवन बहे, धरा पर ओस रहे ,
हरियाली वसुंधरा,
क्षितिज है मान के ।।
चंदन वंदन करें , गीत प्रभु गुन धरें,
नवल प्रभात देख, पौधे रोपे धान के ।।
दिवस कीमती सब, उपभोग हम करें,
दीन दुखी सेवा नित,
करें खूब जान के।।
पूनम शुक्ला
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