*शब्द वंचित*



प्रिय से वंचित देख ,नैन सबके भर आए।

 कोरोना ने हाय, दिवस यह क्यों दिखायें।

मात-पिता का छीन सहारा दुविधा में डाला।

 बच्चों को  भी मात-पिता से वंचित  कर डाला।।

अपनों का यह  दुख  भला कोई कैसे जाने।

रिश्ते नाते मित्र पड़ोसी दुख मे ही पहचाने।।


पूनम शुक्ला

बरेली

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