मनहरण घनाक्षरी रोजाना पटल सजे
मनहरण घनाक्षरी
रोजाना पटल सजे ,कभी नही हम तजे,
नमन वंदन करें,
गुरुको मनाइये ।।
आपकीहै छत्र छाया,जगत केवल माया,
दूर करें अंधकार,
कभी ना सताइये।।
बनेहै प्रेरक आप,धूप दीप शीत ताप,
सीखनेको हैंआतुर,
आपही सिखाइये।।
भाव पक्ष कला पक्ष,किसी मेहै नहीं दक्ष,
पूनमकी हैप्रार्थना,
हमको बताइये।।
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