रोला छंद करते हम सम्मान

 रोला छंद 


करते हम सम्मान, सभी  प्रिय पितर हमारे ।

हैं उनका वरदान, बने हम सबके प्यारे।


 रहते हो किस लोक , पता तो देकर  जाते ।

नित नित आते याद, नहीं हम कुछ कर पाते।


 पाया है आशीष ,आपसे हिम्मत पायी।

धर्म निभाया खूब, शान्ति गृह सुत   है  छायी।


पुरखे आये द्वार,  नमन कर आज मना लो ।

बिगड़े हैं जो काम, याद कर उन्हें बना लो ।।


करना ना कुछ खास, सिर्फ पकवान बनाना।

रखना सब कुछ ध्यान,नहींअब  आप भुलाना ।।



देकर के हैं मान, आपकी पायी छाया ।

कैसे भूलू आज, आपकी निर्मल काया ।।


रहना होगा साथ , पितर हो आप  हमारे।

 सिर पर रख दो हाथ, आप हो  जग से न्यारे।।


मान उपकार ईश ,स्वजन है  साथ जब तक।

मिले प्रतिष्ठा मान,शान पाओगे तब तक।।

 


पूनम शुक्ला

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