दोहे विद्या दो मां शारदे

 आज का अभ्यास

नमन मंच🙏🙏🙏🙏


दोहे


विद्या दो मां शारदे ,बाँटू नित भरपूर ।

विद्या से जीवन चले, नयनों का है नूर ।।


शुभ्र ज्योत्स्ना रख के माँ, दो ऐसो वरदान,

  भाव विमल मुझको मिले ,होवे तेरो मान।।


कलुषित मन न हो मेरा ,तम का करो विनाश,

 उज्ज्वल मन मेंरा रहे, भर दो ज्ञान प्रकाश ।।


माया मोह में फँस  के, भूला तेरो नाम ,

कर दूं बुद्धि बलवती , करूँ  नेक नित काम।।


रहे मधुरता कंठ में ,मन में निश्चल प्यार ।

शब्द सृजन ऐसा करूँ ,बरसे अमरत धार।।


पूनम शुक्ला

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