मनहरण घनाक्षरी राधा कृष्ण संवाद
मनहरण घनाक्षरी
*राधा*
दिन रात एक कर, कान्हा तेरा नाम जपे।
निर्मोही माधव मेरा,
कहां गया श्याम रे।।
आएंगे वापस कह, मथुरा निकल गए,
कैसे रहूं तेरे बिन,
लेते नहीं नाम रे।।
*कृष्ण*
पूरा नहीं तुम बिन, दिन कांटू गिन गिन,
साथ मेरे रहो प्रिये , पूरा करूं काम रे।।
लागे नहीं मन मेरा, राधा मेरी श्याम तेरा ,
असुरों का नाश कर,
आऊं तेरे धाम रे।।
पूनम शुक्ला
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