तांटक छंद सुभाष चंद्र बोस देश प्रेम की दिव्य ज्योति


तांटक छंद  सुभाष चंद्र बोस


 देश प्रेम की दिव्य ज्योति जो, वीर सुभाष जलाई थी ।

प्रेम देश से करने वालों ,ने तब गोली  खाई थी


 जाया किया वीर सुत उसने ,मां की गजब कहानी थी।

 गोरों से भिड़कर सुभाष ने, याद दिलादी नानी थी।।


 राय बहादुर का तमगा जो, पितु सुभाष लौटाया था ,

क्रांतिकारी पिता के निर्णय  , ने तब रंग जमाया था।।


भारत मां के वीर पुत्र ने, जगत किया उजियारा था ।

शुभ्र वर्ण की माला  में ज्यूँ ,चमका मनका प्यारा था।।



विलक्षण बुद्धि का बालक वह, कभी न डरने वाला था।

भाग्य बदलना है  भारत का ,उसने प्रण कर डाला था


मैं  तुमको आजादी दूंगा ,ऐसा उसने बोला था । 

देना होगा  खून  मुझे बस , राज मगर यह खोला था।।


आजाद हिंद फौज गठन  कर ,दिया जय हिंद  नारा था,

वेश बदल कर धूल चटाने,सिवा ना कोई  चारा था।।


गोरों के चंगुल ना आया,ऐसा वह सेनानी था

जीवन दांव लगाया उसने, देश भक्त बलिदानी था।।


पहनी मोटी खाकी उसने,नहीं किसी की मानी है ।

लगे पता तो हमे बताना,लिखनी अमर कहानी हैं।।


पूनम शुक्ला

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