खुद को घर में कैद कर लो ।।
प्यारे बच्चों बस कुछ दिन ,
और सब्र कर लो ।
बाहर बैठा है राक्षस ,
खुद को घर में कैद कर लो ।।
अब करना विश्वास ,
नया सूरज भी चमकेगा ।
फूलों की सुगंध से यह ,
गुलशन भी महकेगा ।।
अभी घर पर रहकर,
डिजिटल लाइब्रेरी से पढ़ना ।
चंपक नंदन शक्तिमान के ,
किरदारो से मन भरना।।
गूगल क्लासरूम से ,
अब और न पढ़ना होगा ।
सुंदर काले बोर्ड से ही ,
जीवन गढ़ना होगा।।
सुबह की प्रार्थना ,
पंक्ति बद्ध कक्षा में जाना ।
चॉक के बहाने गैलरी में ,
दोस्तों से बतियाना ।।
गणित में पाइथागोरस की ,
प्रमेय को समझना ।
अकबर और हुमायूँ की ,
जन्मतिथियों में उलझना ।।
बिना बालक के रूप याद किए,
संस्कृत कक्षा में जाना ।
और फिर वही पुराने श्लोकों को,
लयबद्ध हो सुनाना ।।
मध्यांतर में दोस्तों संग ,
कैंटीन में समोसे खाना ।
बतियाते और खाते समोसे ,
विद्यालय के चक्कर लगाना।।
खेल के कालांश में ,
क्रिकेट में छक्के लगाना ।
खेल में मग्न होकर ,
घंटी को अनसुना कर जाना ।।
सब दिन वापस आएंगे ,
थोड़ा और सब्र कर लो ।
बाहर बैठा है राक्षस ,
खुद को घर में कैद कर लो।।
Comments
Post a Comment