मन मंथन
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।
सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।
इन्हीं मंगलकामनओं के साथ आपका दिन मंगलमय हो
मन – मंथन
निश्चित ही सुंदर नवल ,प्रभात होगा ,
कालरात्रि का अति शीघ्र ,अवसान होगा ।
क्यों करते हो चिंता रे मनुज ,
पुनः सुख मय जीवन का ,आगाज होगा ।।
व्यथित मन से ही सही ,हिम्मत ना हारना होगा ,
नियति का खेल मान, दामन उम्मीद का थामना होगा ।
प्रकृति के विरुद्ध जाकर , विकसित हुए हैं हम ,
संरक्षित कर वृक्ष को ,धरा के अस्तित्व को बचाना होगा।।
क्या खोया क्या पाया , मन मंथन तो करना होगा ,
क्षमा मांग सृष्टि से , पर्यावरण को सहेजना होगा ।
जाने अनजाने में की है, गलतियां बहुतेरी ,
मिला अवसर सुधरने का, जीवन बदलना होगा ।।
भीषण दुश्वारियों का, मुकाबला तो करना होगा ,
बीती ताहि बिसार के, आगे की सुध लेना होगा ।
सौंदर्यीकरण के नाम पर काटें है नूतन वृक्ष भी,
अब पुनः इस धरती को हरियाली से रंगना होगा ।।
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