मनहरण घनाक्षरी 

प्रकृति ईश्वर रची,पुण्य कर्म धरा बची,

वरद हस्त प्रभु तेरा,

सबके पाप हरे।।


मौसम शीतल हुआ,मोर पंखी रंग सुआ,

मीठी बोली बोलकर,

जगत वश करें।।


कार्तिक पावन मास,सृष्टि करे खूब हास,

लक्ष्मी विष्णु पूजकर, 

छूँ भूमि पाँव धरे।


चारो ओर हरियाली, घास मिले ओस वाली,

गुलाबी है ठंड तन,

मन उमंग भरे।।


पूनम शुक्ला

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